Sunday 23 August 2009

रियलिटी शो - इतिहास, नक़ल और बाज़ार



दुनिया में रियलिटी शो से जुडे़ कुछ महत्वपूर्ण वर्ष व दास्तान

1948 - दुनिया का पहला रियलिटी शो अमेरिका में एलन फन्ट द्वारा निर्मित हुआ, जिसका नाम कैंडिड कैमरा था। यह एक तरह से प्रेंक रियलिटी शो था, जो पूर्व में कैंडिड माइक्रोफोन के नाम से रेडियो पर प्रसारित किया जाता था।

1973 - एन अमेरिकन फैमिली आधुनिक सन्दर्भों में दुनिया का पहला रियलिटी टीवी शो था। इसमें एक ऐसे परिवार को केन्द्र में रखा गया था, जो तलाक के दौर से गुजर रहा था।

1974 - ब्रिटेन में एन अमेरिकन फैमिली की नकल से द फैमिली की शुरुआत हुई।

1977-78 - द डेटिंग गेम, द न्यूलीवेड गेम इत्यादि रियलिटी शो की शुरुआत हुई।

1996 - ब्रिटिश टीवी शो चेंजिंग रूम से आत्म विकास और बदलाव वाले रियलिटी शो की शुरुआत हुई।

1997 - स्वीडिश रियलिटी शो एक्सपीडिशन रोबिनसन से रियलिटी शो में कायदे से कंपीटिशन और एलिमिनेशन की शुरुआत हुई। सर्वाइवर व सिलेब्रिटी सर्वाइवर जैसे रियलिटी शो इसे से निकले।
1998 - ब्रिटेन में हू वांट्स टु बी मिलिनेयर शुरू हुआ, तो पूरी दुनिया में तहलका मच गया। यह अब तक का सबसे पॉपुलर रियलिटी शो है। 100 से ज्यादा देशों में लोगों ने इसे देखा है, इस कार्यक्रम की फ्रेंचाइजी दुनिया भर में बिकी है।

2002 - अमेरिकन आइडल की शुरुआत हुई, जिससे गीत-संगीत आधारित रियलिटी टीवी शो की दुनिया में एक क्रांति आई।

---भारत की कहानी---

1994 - जीटीवी ने सबसे पहले अंताक्षरी के तौर पर प्रतियोगिता शुरू की थी, जिसे देश का पहला टीवी रियलिटी शो कहा जा सकता है।

1995 - सारेगामापा जैसे टैलेंट हंट शो की शुरुआत हुई।

1996 - दूरदर्शन ने भी इसी तर्ज पर मेरी आवाज सुनो प्रतियोगिता करवाई। कार्यक्रम सफल रहा।
2000 - भारत में अमिताभ बच्चन के संचालन में कौन बनेगा करोड़पति शुरू हुआ। इस रियलिटी गेम शो ने टीवी की भूमिका को बदलकर रख दिया। उसके बाद रियलिटी शो की बाढ़ सी आ गई।

2004 - इंडियन आइडल की शुरुआत से रियलिटी शो को एक सकारात्मक दिशा मिली। यह शो बहुत कामयाब रहा।

2006 - बिग बॉस शुरू हुआ, जिसमें कुछ नामचीन लोगों को एक घर में कई दिनों तक रखा गया, जो आखिर तक रहा, जिसे ज्यादा वोट मिले, वह जीता। शो चर्चित हुआ।

2009 - यह साल भारत में रियलिटी शोज की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहा। कई शो शुरू हुए, सर्वाधिक चर्चा राखी का स्वयंवर और सच का सामना की हुई। कुछ भारतीय सेलीब्रिटी क्वइस जंगल से मुझे बचाओं जैसे रियटिली शो के लिए विदेश अथाüत मलयेशिया के जंगल में पहुंच गए।

----कुछ ही मौलिक---

भारत में कुछ ही रियलिटी शो मौलिक हैं और हम लोकप्रियता के लिहाज से बात करें, तो सबसे पहले अंताक्षरी, बूगी-वूगी, सारेगामापा, तोल-मोल के बोल, सांप-सीढ़ी का नाम लिया जा सकता है। भारत में ज्यादातर रियलिटी टीवी शो नकल हैं या किसी विदेश शो से प्रेरित हैं। नकल करके बनाए गए लोकप्रिय रियलिटी कार्यक्रमों इस प्रकार हैं
- कौन बनेगा करोड़पति - हू वांट्स टू बी ए मिलिनेयर
- इंडियन आइडल - अमेरिकन आइडल
- बिग बॉस - बिग ब्रदर
- सच का सामना - मोमेंट ऑफ ट्रूथ

- क्या आप पांचवी पास से तेज हैं - आर यू स्मार्टर देन फिफ्थ ग्रेडर

- दस का दम - पावर ऑफ टेन

- सरकार की दुनिया - सरवाइवर

- झलक दिखला जा - डांसिंग विद स्टार्स

- राखी का स्वयंवर - द बेचलरेट

- इस जंगल से मुझे बचाओ - आई एम ए सेलीब्रिटी ज् गेट में आउट ऑफ हीयर

- छुपा रुस्तम - हाइडिंग कैमरा

- पति, पत्नी और वो - बेबी बोरोअर्स

--बढ़ता बाजार---

आज टीवी का 20 प्रतिशत समय रियलिटी शोज के हवाले है। पिछले दो वर्ष में काफी तेजी से लोकप्रियता बढ़ी है। रियलिटी शो का हिस्सा बढ़ने की शुरुआत वर्ष 2000 में अमिताभ द्वारा प्रदर्शित कौन बनेगा करोड़पति से हुई थी। आज रियलिटी शो अज्छी कमाई कर रहे हैं, इसलिए उनका हिस्सा बढ़ रहा है। टीवी चैनल की टीआरपी भी इन्हीं से तय होने लगी है। धारावाहिकों से ऊबे हुए लोग रियलिटी की ओर रुख कर रहे हैं, तो तरह-तरह के रियलिटी शो शुरू होने वाले हैं। फिलहाल देश में पचास से ज्यादा रियलिटी शो चल रहे हैं। किसी धारावाहिक की एक कड़ी के निर्माण पर 5 से 6 लाख रुपये खर्च होते हैं, जबकि रियलिटी शो की एक कड़ी पर अधिकतम 15 से 20 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। लेकिन तब भी रियलिटी शो बनाना फायदे का धंधा है। प्राइम टाइम की अगर हम बात करें, तो धारावाहिक के समय विज्ञापन प्रसारण की कीमत अधिकतम एक लाख रुपये प्रति दस सेकंड होती है, जबकि रियलिटी शो के दौरान विज्ञापन प्रसारण से प्रति दस सेकंड दो लाख रुपये तक कमाई होती है। जाहिर है, रियलिटी में पैसा बरस रहा है।

Sunday 16 August 2009

फिर जिन्ना पर आया प्यार

हमारे देश में कुछ नेताओं का चिंतन इतना फिजूल है कि इससे केवल उनका बौद्धिक विलास झलकता है और यह भी जाहिर होता है कि वे जमीनी हकीकत से कितने कटे हुए हैं। आज अनेक समस्याएं विकराल रूप ले चुकी हैं, लेकिन इन नेताओं का शर्मनाक अतीत में झांकने का शौक देश की आम गरीब जनता को केवल निराश करता है। दार्जिलिंग से चुनाव जीतने वाले राजस्थानी नेता जसवंत सिंह ने किताब लिखी है जिन्ना - इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंस। किताब में पंडित नेहरू को निशाना बनाया गया है और जिन्ना की छवि को सुधारने की कोशिश हुई है। जसवंत के मुताबिक, देश के विभाजन के लिए पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना नहीं, बल्कि पंडित नेहरू की बेहद केन्द्रीयकृत राजनीतिं जिम्मेदार थी। यह बात भारतीयों के मनोबल पर कितना नकारात्मक असर डालेगी, इस पर जसवंत ने कोई चिंतन नहीं किया है। कांग्रेस को निशाना बनाने की कोशिश में जिन्ना का महिमामंडन निंदनीय है। इतिहास गवाह है, जिन्ना बहुसंख्यक जमात के साथ रहने को तैयार नहीं थे, जबकि पंडित नेहरू को मजहब से कोई परेशानी नहीं थी। जिन्ना ने मुस्लिम राष्ट्र बनाया और पंडित नेहरू ने जो बनाया, वह धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना। सांप्रदायिकता के आधार पर भारत वर्ष को विभाजित करने के बाद जिन्ना खुद भी चिंतित थे, क्योंकि पाकिस्तान में कथित धर्म प्रेम कट्टरता की हदें पार करने लगा था, तभी तो जिन्ना ने अपने देशवासियों से आह्वान किया था कि आज से हम हिन्दू या मुस्लिम नहीं, बल्कि पाकिस्तानी होंगे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। जिन्ना भी भारत के अंदर कई पाकिस्तान देखना चाहते थे, कश्मीर हड़पने का अभियान उनके ही इशारे पर शुरू हुआ होगा। भाजपा नेताओं में पहले लालकृष्ण आडवाणी और अब जसवंत सिंह ने जिन्ना के प्रति अपने प्रेम को उजागर किया है। जसवंत ने एक वार्ता में कहा है कि जिन्ना महान थे। गांधी जी ने भी उन्हें महान भारतीय कहा था। जसवंत ने यह नहीं बताया है कि गांधी जी ने जिन्ना को महान भारतीय क्यों कहा था और जिन्ना किस तरह से भारतीयता को ठोकर मारकर भारतीयों को खून के आंसू रुलाकर पाकिस्तानी हो गए। जिन्ना के मुख से आए किन्हीं एक-दो बयानों का हवाला देते हुए उन्हें महान नहीं ठहराया जा सकता। वह ब्यक्ति राजनेता भले ही हो, लेकिन महान कैसे हो सकता है, जिसे दूसरे धर्म के लोगों के साथ रहना तक स्वीकार न हो। जिन्ना तो उसी दिन नाकाम हो गए थे, जब उनके वंशजों ने भारत में रहने का फैसला किया। आज जिन्ना के वंशज भारत में बेहद अमीर और सम्मानित हैं, लेकिन जसवंत को लगता है कि भारत में मुसलमानों के साथ दूसरे ग्रह के प्राणियों जैसा व्यवहार किया जाता है। क्या शाहरुख खान दूसरे ग्रह के प्राणी हैं, जिन्हें अमेरिका में परेशान किए जाने पर सभी जागरूक भारतीय नाराज हैं? जसवंत को केवल यही नजर आया कि मुसलमानों ने विभाजन की कीमत चुकाई है। क्या हिन्दुओं ने कीमत नहीं चुकाई है? जसवंत की इस बात का समर्थन किया जा सकता है कि अविभाजित भारत में मुसलमान ज्यादा मजबूत हो सकते थे, लेकिन क्या उन्हें यही बात हिन्दुओं के लिए नहीं कहनी चाहिए थी? इस किताब से आतंकवाद, महंगाई, मंदी और मौसम की मार झेल रहे देश को कोई लाभ नहीं होने वाला, उल्टे इससे पाकिस्तान और बांग्लादेश में भारत विरोध को ही बढ़ावा मिलेगा।