Wednesday 14 October 2009

बेमिसाल अमिताभ




( yah sambhavtah amitabh bachchan ke janmdin par likha gaya akela prakashit sampadkeey hai )
उम्र के 68वें साल में प्रवेश कर चुके अमिताभ ऐसी बेमिसाल हस्ती हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। भारत में शायद किसी भी जीवित हस्ती के जन्मदिन पर इतना धूमधड़ाका नहीं होता है। गैर-सरकारी स्तर पर ही सही, अमिताभ का जन्मदिन साल दर साल खास बनता जा रहा है। केवल फिल्म उद्योग ही नहीं, बल्कि पूरी मनोरंजन की दुनिया में अमिताभ का कोई सानी नहीं है। कालिया फिल्म में अमिताभ का एक संवाद, - हम जहां पे खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती हैं, - बेहद अर्थपूर्ण है। मनोरंजन की दुनिया में उनके द्वारा शुरू की गई लाइनें दिनों-दिन लंबी होती जा रही हैं। फिल्म सात हिदुस्तानीं से लेकर रियलिटी शो बिग बॉस-तृतीय तक अमिताभ द्वारा शुरू की गई लाइनों, प्रतिमानों और शैलियों का कोई अंत नहीं है। भारत में सबसे ज्यादा नकल अगर किसी हस्ती की हुई होगी, तो वो अमिताभ ही हैं। हर छोटा-बड़ा कलाकार कभी न कभी उनकी किसी शैली को आजमाने की कोशिश करता है। बेशक, उनके आलोचक भी हैं, लेकिन जिस देश में राष्ट्रपिता का दर्जा प्राप्त हस्ती की आलोचना हो सकती है, वहां अमिताभ आलोचना से कैसे बच सकते हैं। हालांकि कई मौके आते हैं, जब अमिताभ अपने विशाल कद से आलोचकों को बौना बना देते हैं।


आखिर क्या है अमिताभ बच्चन होना? हम उनसे क्या सीख सकते हैं? पहली बात, परिवार के प्रति अमिताभ का प्रेम अनुकरणीय है। उनके माता-पिता को लंबा जीवन मिला, क्योंकि अमिताभ ने अपने माता-पिता को वह स्थान और वह जरूरी आजादी दी, जो आजकल की सफल संतानें अपने अभिभावकों से छीन लेती हैं। पिता की चरणों में जगह खोजने वाले पुत्र के रूप में, अपने बेटे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते पिता के रूप में वे आदर्श हैं। हॉलीवुड के कई महान अभिनेता अपनी शादियों की वजह से भी जाने गए हैं, लेकिन अमिताभ यहां भी आदर्श हैं।
उनकी दूसरी बड़ी खूबी है, हमेशा कुछ नया करने की कोशिश। एंग्री यंगमैन की नई धारा, कमाई के पैसे के उचित निवेश का तरीका, चुनावी राजनीति में अभिनेताओं के लिए द्वार खोलने की जिम्मेदारी, राजनीति से पल्ला झाड़ने एवं फिर न लौटने का वचन, हर संभव चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं, बड़े परदे से छोटे परदे पर पदार्पण, सक्रिय ब्लॉग लेखन और अब बिग बॉस- तृतीय में मेजबान की भूमिका, अमिताभ ने हमेशा नया करने की कोशिश की है, खतरे उठाए हैं। एकाध विफलताओं को छोड़ दीजिए, तो वे आज सफलतम हस्ती हैं। त्रिशूल फिल्म में उनका एक संवाद है, सही बात सही वक्त पे की जाए, तो उसका मजा ही कुछ और है और मैं सही वक्त का इंतजार करता हूं। - यह हमारे जीवन प्रबंधन में भी बड़े काम का वाक्य है।
अमिताभ की तीसरी बड़ी खूबी है कठोर परिश्रम।
चौथी बड़ी खूबी है वक्त का सम्मान । उनके जीवन में एक-एक मिनट मायने रखता है और सेट पर समय पर पहुंचने के लिए भी जाने जाते हैं।
पांचवी खूबी, उन्होंने हमेशा भारतीयता का आदर किया है। हॉलीवुड की दादागिरी उनके सामने बेदम हो जाती है और भारतीय बॉलीवुड पूरी मजबूती से उभरता है। आज उन जैसे खांटी अरबपति भारतीय दुर्लभ हैं। भारतीय संस्कृति ही नहीं, राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति उनका सहज समर्पण दूर देश तक लोगों को हिन्दी सीखने के लिए प्रेरित करता आया है।
अमिताभ की छठी खूबी है वो मुंबई मे रहकर भी इलाहाबादी हैं। लोग बड़े शहरों मे जाकर अपने गाँव, बोली , लहजे को भुला देते हैं लेकिन इस मोर्चे पर भी अमिताभ एक मिसाल हैं.
अमिताभ अकसर दूसरों को शतायु होने का आशीर्वाद देते हैं, आइए हम दुआ करें कि वे स्वयं भी शतायु हों।